• Subhasish Mishra

Software Engineering a layered technology क्योँ कहा जाता है?

इस पोस्ट में software engineering a layered technology kyoun kaha jaata hai in Hindi के बारे में बताने जा रहा हूँ। एक software develop करने से पहले हमे ये जरूर पता होना चाहिए की एक software develop होने से पेहले कौनसी layers में हो कर गुजरता है।तो चलिए जानते हैं की यह layered technology क्या है।


साधारणतः software development process मे 4 layers होते हैं।

  1. Quality Focus

  2. Process

  3. Methods

  4. Tools

1.Quality Focus:

यह software Engineering का सबसे महत्वपूर्ण layer है। आप दुनिया में कोई भी product देख लीजिये उनमे जो सबसे जरुरी होता है वो है Quality. जित्तना अच्छा product का quality होगा उतना ही ज्यादा user को पसंद आएगा। इसीलिए जब product बनाया जाता है सबसे पहले quality का ख्याल रखा जाता है। इस layer को software development का Bedrock भी कहा जाता है।


Quality Focus के अंदर भी कई सारे parameters को देखा जाता है। जैसे


Degree Of Goodness: यह parameter तय करता है की software के quality कितनी सही और यह user को कितना पसंद आएगा।


Correctness: इस में यह पता लगाया जाता है की software को जिस मकसद से बनाया गया था वो पूरा हो राहा है या नहीं। अगर नहीं हो रहा है तो क्या क्या कमी है और उसे कैसे ठीक किया जा सकता है ये भी तय किया जाता है।


Maintainability: यह parameter से हमे यह पता चलता है की एक बार software develop होने के बाद उसे maintain करना कितना आसान होता है। एक software का maintenance जितना सहज होता है उस software का quality उतना बढ़ जाता है।


Usability: यह सबसे महत्वपूर्ण parameter है, क्योँ की software चाहे जितना भी अच्छा हो लेकिन अगर उसको आसानी से इस्तमाल नहीं किया जा सकता है तो उस software का कोई value ही नहीं रहता है। User ज्यादातर उस product को पसंद करते हैं जिसे आसानी से इस्तमाल किया जा सकता है।

2.Process:

इस layer मे एक software को बनाने के लिए अलग अलग तरीके के सवाल पूछा जाता है। इसको हम अगर आसान भाषा में समझेंगे तो "what & how questions". हम सबको पता है की एक साधारण product बनाने से पहले भी कई सारे सवाल खड़े होते हैं। जैसे की product और software "कैसे काम करेगा?", "क्या काम करेगा?", "क्योँ बनाया गया?", "कोनसे device पर काम कैरगा?" .


इन सारे सवालों को इकठा करके इन सबका उत्तर निकले जाते है एक और layer मैं जिसे Method कहा जाता है।

3.Method:

जैसे की मैंने बताया इस layer में Process layer के सवालों का जवाब ढूंढा जाता है। यहां पर कई parameters को इस्तमाल करके उन सवालों का जवाब निकले जाते हैं।

Communication: Method layer का सबसे जरुरी parameter है communication. इसका मतलबी है की customer और organization के बिच एक बेहतरीन communication होना चाहिए। इससे developers को ये पता चलता है की customer किस तरह का software बनवाना चाहता है।


Requirement & Design Model Analysis: एक बार customer का requirements पता चलने के बाद उनको नजर में रख के software को सही तरीके से बनवाना होता है। और Design भी इस तरह होना चाहिए ता की हमारे Quality focus layer के सारे condition को satisfy करता हो।


Use Of Programming Tools: एक बार Requirement & Design Model Analysis होने के बाद अब हमे ये तय करना होता है की कौनसे programming language का इस्तमाल करके software को बनाया जायेगा और कौन से tools का इस्तमाल किया जायेगा।


Testing & Support: एक बार software बनने के बाद अब बारी आती है testing की। यह software development सबसे जरुरी हिस्सा है। कुछ sample डाटा के साथ Testing करने के बाद ही पता चलता है की सॉफ्टवेयर के अंदर क्या क्या खामियां है। और जरुरी supports के मदद से उन सबको फिरसे ठीक किया जाता है।

4.Tools:

एक software develop करने में हमेशा कई सारे tools की जरुरत पड़ती है, चाहे वो code लिखने केलिए हो या design करने के लिए हो या testing करने के लिए या फिर sell करने के लिए हो। ये tools आपको software development के दौरान एक environment प्रदान करते हैं जो आपको automated या फिर semi automate रूप से आपको मदद करते हैं।


उम्मीद है आपको आपके सवाल का जवाब मिल गया होगा। फिर भी अगर कोई सवाल है तो निचे comment करके जरूर बताये। हमारे पोस्ट को Like और share जरूर करे।